Posts

Showing posts from June, 2022

दिल-ए-नादान तुझे हुआ क्या है

दिल-ए-नादान तुझे हुआ क्या है आख़िर इस दर्द कि दवा क्या है। हम हैं मुश्ताक और वो बेज़ार या इलाही ये माजरा क्या है। मैं भी मुँह मे ज़बान रखता हूँ काश पूछो कि मुद्दा क्या है। जब कि तुझ बिन नही कोई मौजूद फिर ये हंगामा ए खुदा क्या है। हमको उनसे वफ़ा की है उम्मीद जो नहीं जानते वफ़ा क्या है। जान तुम पर निसार करता हूँ मैं नहीं जानता दुआ क्या है। मैंने माना कि कुछ नहीं ग़ालिब मुफ़्त हाथ आये तो बुरा क्या है ।

ghalib

आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक। आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होने तक। हम ने माना कि तग़ाफुल न करोगे लेकिन ख़ाक हो जाएँगे हम तुमको ख़बर होने तक। ग़म-ए-हस्ती का ‘असद’ किस से हो जुज़ मर्ग इलाज शमा हर रंग में जलती है सहर होने तक।

બાપ-father ppa

હમેં પઢાઓ ન રિશ્તો કી કોઈ ઔર કિતાબ પઢી હૈ બાપ કે ચહેરે કી ઝુર્રીયા હમ ને બાપ જીના હૈ જો લે જાતા હૈ ઊંચાઈ તક મા દુઆ હૈ જો સદા સાયા-ફગન રહતી હૈ *જીના-સીડી *સાયા-ફગન = પડછાયો 'અજીજ-તર મુજે રખતા હૈ વો રગ-એ-જાં સે યે બાત સચ હૈ મેરા બાપ નહીં કમ મા સે' ~તાહિર શહીર 'અજીજ-તર મુજે રખતા હૈ વો રગ-એ-જાં સે યે બાત સચ હૈ મેરા ભાઈ નહીં કમ મા સે'