राह में खतरे भी है लेकिन ठहरता कौन है मौत कल आती है आज आ जाये डरता कौन है तेरे लश्कर के मुकाबिल, मैं अकेला हूँ मगर फैसला मैदान में होगा कि मरता कौन है..!
फासला रख के भी क्या हासिल हुआ आज भी केहलाता उसीका हूँ मैं फासला रख के भी क्या हासिल हुआ आज भी उस का ही कहलाता हूँ मैं फासला रख के भी क्या हासिल हुआ आज भी आप का ही कहलाता हूँ मैं
मेने कहा रब से: इस बार मुझे रमजान मुबारक में तोहफे में मौत चाईए... दिल से आवाज़ आयी: मौत इतनी आसान नहीं न बेटा, वैसे भी मौत मांगना गुनाह है मेने फिर से कहा: तो जो चाईए वो दे दो ना
એક આંખથી જોતા પૂરા જગતમાં મને કોઈ સારો જણાતો નથી, બીજી આંખે જોતા નરસો કોઈ નજરે ચડતો નથી./not sure Bt ઉપરવારા એ બે આંખો દીધી છે તો ઉપયોગ કરોને વ્હાલા જોતા નથી આવડતું કે પછી જોવું નથી અચ્છાઈનુ તફાવત મને એટલું જણાય છે ન બોલીએ તો સારું ન બોલીએ તો સારું કરતાં માથે ચડાય છે/