कहानी मुख़्तसर थी



सरु हुई अनजाने से
आ पहुंची दिल के पैमाने तक
मुसलसल तेरी कसर थी
कहानी मुख़्तसर थी

ख्वाबो उम्मीद जग गई
सबको खबर लग गई
क्या करते बेबस बन्दे
नज़र लगनी थी, लग गई

क्या बताऊं क्या बात थी
क्या शाम, क्या रात थी
खूबसूरत क्या सजर थी
कहानी मुख़्तसर थी

Comments

Popular posts from this blog

📓📖📕પુસ્તક સમીક્ષા📕📖📓

Mera hona