एक शख्स था...! 20-8-21


एक शख्स हुआ करता था..!
मेरे जहन-ओ-जहां से
रूह के अमान तक...

एक शख्स हुआ करता था..!
मेरे दिल के करीब
सफर-ऐ-गुमान तक...

एक शख्स हुआ करता था..!
सहर की रौशनी से
आफताब-ऐ-आसमान तक...

एक शख्स हुआ करता था..!
हाल-ऐ-कशिश से 
सांस के फरमान तक...

एक शख्स हुआ करता था..!
होठो के तबस्सुम से
रोते हुए रूहान तक...

एक शख्स हुआ करता था..!
ख्वाब-ऐ-मंजर से
हक़ीक़त-ऐ-दास्तान तक...

एक शख्स हुआ करता था..!
आरज़ू-ऐ-मोहब्बत से
नफरत के मक़ाम तक...


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