रुकी है...!




दिल तो हर कोई दे सकता है, 
बात जान पर आ के रुकी है...!

वादा तो हर कोई कर सकता है, 
बात वक़्त पे आ के रुकी है...!

मोहब्बत कोई भी कर सकता है, 
बात ईबादत पे आ के रुकी है...!

बिछड़ना भी नसीब हो अगर;
बात इंतज़ार पे आ के रुकी है...!

फासला तय करने लगा है दूरियां;
बात मुलाक़ात पे आ के रुकी है...!

मिल जाते गर तुम, तो जी लेते सनम
बात बस चंद साँसों पे आ के रुकी है...!




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